ट्रांसजेंडर लोगों को हमारे समाज में हमेशा अलग नजरिए से देखा जाता है और लोग उनको समाज से दूर रखते हैं. ट्रासंजेडर होना ये एक नसीब का खेल हैं, लेकिन लोग इसे काफी बुरी तरह से देखते हैं जो काफी गलत हैं.

आज ट्रांसजेंडर लोगों ने काफी अलग अलग क्षेत्र में आगें बढ़ने की कोशिश की है और हर क्षेत्र में बड़ा काम करने का प्रयास कर रहे हैं. पहले ट्रांसजेंडर लोगों को सिर्फ रास्ते पर पैसे मांगते हुए नजरिए से लोग देखते थे, लेकिन आज ऐसा नहीं है.

आज हम आपको एक ऐसे ट्रांसजेंडर व्यक्ति के बारें में बताएंगे जो आज देश के पहले ट्रांसजेंडर पायलट बन चुके हैं.

माता-पिता ने घर से बाहर निकाला:

आज हम जिस शख्स की बात कर रहे हैं उनका नाम एडम हैं जो केरल के रहने वाले हैं. एडम के माता-पिता को जब पता चला की उनका बच्चा ट्रांसजेंडर हैं तो उन्होंने एडम के साथ काफी बुरा बर्ताव किया और उससे मारपीट भी की. फिर उन्होंने एडम को घर से बाहर निकाला और एडम अपने माता-पिता से दूर हो गये. फिर एडम को काफी दिनों तक रास्ते पर ही सोना पड़ा और पैसे मांगकर रास्ते पर ही सोना पड़ा.

नौकरी करके शुरू किया नया जीवन:



एडम ने फिर रास्ते पर एक जूस की दुकान पर नौकरी करनी शुरू की, लेकिन ट्रांसजेंडर लोगों के लिए समाज में काफी घृणा रहती हैं जिस वजह से उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. बाद में एडम ने सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट से संपर्क किया और वहां उनको पढ़ाई को लेकर काफी मदद मिली.

सरकार से मिली मदद:

एडम को सरकार से पढ़ाई को लेकर काफी मदद मिली जिस वजह से एडम ने राजीव गांधी एकेडमी फॉर एविएशन टेक्‍नोलॉजी से पायलट का कोर्स किया और डिग्री हासिल की जिससे उनका पायलट बनने का सपना पूरा हो सका.

पायलट बनकर किया अपना सपना पूरा:

एडम ने फिर प्राइवेट पायलट लाइसेंस की ट्रेनिंग पूरी की और उनको जोहानिसबर्ग में लाइसेंस भी मिला और आज वो देश के पहले ट्रांसजेंडर पायलट बन चुके हैं जिससे उन्होंने ये साबित कर दिया है की अगर आप कुछ करना चाहते हो‌ तो आप कैसे हैं, लोग आपके बारें में समाज में क्या बोलते हैं ये सबको पीछे छोड़कर अपना सपना पूरा कर सकते हैं.

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