सुमिता  स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी में फार्मेसी की प्रोफेसर है। इन्हें अपने आसपास हरियाली देखना काफी पसंद था क्योंकि उनका बचपन तिनसुकिया के पास एक छोटे से शहर में गुजरा था। जहां काफी हरियाली रहती थी। सुमिता  ने एक बातचीत के दौरान बताया कि उनके पिता का ट्रांसफर असम में हो गया था। जिसके कारण उन्हें अपने आसपास हरियाली की कमी बहुत खलती थी। उन्हें कहीं भी थोड़ी बहुत जगह भी दिखती तो वे वहां पौधे लगाने लगती है ।

8 फीट की बालकनी में उगाए 300+ पौधे, मेरठ में ले आयीं असम की यादें

सुमिता  अपने फार्मेसी की पढ़ाई के लिए लखनऊ हॉस्टल में रहने के लिए गई थी। वहां पर भी उसने कई सारे पौधे लगाए थे। सुमिता अभी मेरठ में फ्लैट में रहती है।उनकी फ्लैट में 7 से 8 फुट की 2 बालकनियां है वह अपने बालकनी मे बागवानी कर रही है। उन्होंने अपने इन बालकनी में ही 120 तरह के 300 से अधिक पौधे लगाए हैं।

balcony gardening

सुमिता  के घर वाले घरों में पौधे लगाना पसंद नहीं करते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि घरों में ज्यादा पौधे रहने से काफी मच्छर रहेंगे और ज्यादा गमले की वजह से घर के छत पर नुकसान होगा। लेकिन सुमिता   इन सभी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देती थी क्योंकि उन्हें पौधों के प्रति काफी लगाव था ।

gardening

सुमिता इनडोर प्लांट्स ज्यादा लगाती हैं। सुमिता  कहती है कि इनडोर प्लांट से घर की हवा ताजी रहती है और साथ ही साथ ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ती है। उनके पास इनडोर प्लांट की कई वैरायटी है। उन्हें हर्ब्स प्लांट लगाने का भी बड़ा शौक है। जो छोटी सी बालकनी में लगाना मुश्किल है, फिर भी सुमिता सीजनल सब्जियां लगाती है ।

home gardening

सुमिता  रसोई से निकलने वाले कचरे को बाहर नहीं फेंकती है बल्कि अपने बाल्कनी गार्डन में इस्तेमाल करती हैं । रसोई के कचरे यानी फलों और सब्जियों की कचरे से कंपोस्ट बनाती है और आमतौर पर सब्जियां, फल और चावल को धोने के बाद पानी को पौधे में डाल देती हैं। इससे पौधे को पोषण भी मिल जाता है और साथ ही साथ पानी का भी बचत हो जाता है।

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जगह कम होने की वजह से पौधे की स्थान बदलते रहती हैं ताकि सूरज की रोशनी सभी पौधों को मिल सके। पौधों का ज्यादा वजन ना हो इसलिए वह मिट्टी के गमलों के जगह प्लास्टिक के गमलों का इस्तेमाल करती हैं और हैंगिंग गमले का भी इस्तेमाल करती हैं। सुमिता पौधे लगाना पसंद करती ही हैं और साथ ही साथ दोस्तों को भी पौधे लगाने के लिए प्रेरित करती है।

By editor

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