भारत में कई राज्यों में है एक से ज्यादा राजधानी, जानिए उसके पीछे की वजह!

अगर हम किसी भी देश या राजधानी के बारे में बात करें तो सबसे पहले हमारे दिमाग में ये ही आता है कि सत्ता का मुख्य केंद्र। किसी भी देश या राज्य की वो जगह होती है जहाँ से देश एवं राज्य की राजनीति का सारा खेल खेला जाता है। अगर कोई शहर बन जाता है तो उस शहर के विकास के रास्ते में फिर कोई नहीं आ सकता। इसी कारण है कि लोग आज भी समय समय पर अपने शहर को राजधानी बनाने की मांग करते हैं।

 

आंध्र प्रदेश में है अब 3 राजधानी, तमिलनाडु में भी 2 राजधानी करने की मांग

पिछले साल जनवरी में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की कैबिनेट ने राज्य के लिए 3 राजधानियों के प्रस्ताव को मंजूरी दी और इस प्रस्ताव को आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वासभान हरिचंदन द्वारा इसे स्वीकार कर लिया गया. इस नई प्रस्ताव के अनुसार विशाखापत्तनम राज्य की कार्यकारी राजधानी होगी, अमरावती राज्य की विधायी राजधानी तो वहीं कुरनूल राज्य की न्यायिक होगी। दक्षिण भारत के एक दूसरे राज्य तमिलनाडु में भी राज्य सरकार ने दूसरी राजधानी के लिए प्रस्ताव पेश किया है। लोगों का कहना है मदुरै को दूसरा राजधानी बनाया जा सकता है। राज्य के अधिकारियों का कहना है कि इससे चेन्नई पर दबाव कम होगा और राज्य के दक्षिणी जिलों में औद्योगिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.

एक राज्य में एक से ज्यादा राजधानी का उद्देश्य

अगर आप आंध्र प्रदेश की तीनो राजधानियों को देखा तो तीनो एक दूसरे से काफी दूर है। अमरावती से कुरनूल और विशाखापत्तनम 700 किमी की दूरी पर मौजूद है। कई सीनियर अधिकारियों का कहना है कि अलग अलग राजधानी के मध्यम से विभिन्न और विविध चैनलों के माध्यम से आर्थिक विकास को फैलाने में मदद मिल सकती है । कई लोगों का ये भी मानना है कि राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में अलग अलग राजधानी होने से उसके आसपास के शहरों और गांवों में विकास के अंतर को कवर करने में मदद मिलती है.

हालाँकि ये भारत में पहली राज्य भारत में कई ऐसे राज्य है जहाँ एक से ज्यादा राजधानी है। आज हम वैसे ही राज्य की बात करेंगे जहाँ एक से ज्यादा राजधानी है साथ ही उनकी वजह को भी जानेंगे।

भारत के वो राज्यों जहाँ है एक से ज्यादा राजधानी :-

महाराष्ट्र

आपको बता दे पश्चिम भारत में स्थित महाराष्ट्र में भी दो राजधानी है मुंबई और नागपुर । आज नागपुर महाराष्ट्र की शीतकालीन राजधानी की रूप में जानी जाती हैं ।

वजह?

राज्यों का पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के द्वारा भारत के राज्यों को भाषाओं के आधार पर विभाजित किया गया जिसमें से एक राज्य महाराष्ट्र भी था। बॉम्बे राज्य में रहने वाले मराठी लोगों ने दूसरी राज्य की मांग की तब बॉम्बे राज्य को महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजित किया गया.

साल 1953 में भारत के कई राजनीतिक नेताओं ने एक समझौता किया, जिसका नाम नागपुर समझौता दिया गया। इसी समझौता के चलते तत्कालीन बॉम्बे राज्य, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों, तत्कालीन हैदराबाद राज्य और विदर्भ से मराठी भाषी क्षेत्रों के साथ महाराष्ट्र का निर्माण हुआ.

मुंबई से विदर्भ की दूरी 1000 किमी की है उसी कारण विदर्भ को लोगों के मन में ये आशंका थी कि कहीँ वो विकास से दूर न रह जाए उसी कारण नागपुर को महाराष्ट्र का दूसरा राजधानी बनाया गया। साथ ही कहा गया कि शीतकालीन सत्र में होने वाली विधानसभाओं का आयोजन नागपुर में होगा और विदर्भ की आबादी के मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा.

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कर्नाटक

आपको बता दे उत्तरी कर्नाटक में स्थित बेलगावी जिससे पहले बेलगाम के नाम से जाना जाता था उसे कर्नाटक की दूसरी राज्य माना जाता हैं पर अभी तक इसे आधिकारिक तौर पर राजधानी घोषित नहीं किया गया है। बेलगावी बंगलुरु के बाद कर्नाटक की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी वाला जिला है।

वजह?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बंगलुरु के अलावा बेलागवी को दूसरी राजधानी बनाने का कारण ये था कि इस शहर के साथ ही उत्तरी कर्नाटक के अन्य हिस्सों को विकास के मामले में उपेक्षित किया गया था। इस जिले में रहने वाले लोग बहुत समय से महसूस किया कि इस क्षेत्र की आबादी बढ़ रही थी, लेकिन शहर के बुनियादी ढांचे में बहुत कम या कोई सुधार नहीं हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रकिशित एक लेख से पता चलता है कि ये कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच एक राजनीतिक स्थिति के कारण था।

साल 2012 में एक राज्य विधानसभा भवन ‘Suvarna Vidhana Soudha’ बेलगावी में बनाया गया, जहां राज्य की विधानसभा के शीतकालीन सत्र आयोजित किए जाते हैं ।

जम्मू और कश्मीर

हाल ही में राज्य से केंद्र शासित राज्य बने जम्मू और कश्मीर की भी पहले से दो राजधानी है। यहाँ ग्रीष्मकाल में श्रीनगर और सर्दियों में जम्मू को राजधानी माना जाता है। हर साल मई से अक्टूबर तक प्रदेश की सभी विधायी बैठकें श्रीनगर में आयोजित की जाती हैं और नवंबर से अप्रैल तक वे जम्मू में स्थानांतरित हो जाते हैं, जो राज्य की शीतकालीन राजधानी है.

वजह?

आपको बता दे जम्मू एंड कश्मीर में होने वाले इस शिफ्ट को को ‘दरबार मूव’ के नाम से जाना जाता है। इसे 19वी सदी में जम्मू एंड कश्मीर के महाराजा रणबीर सिंह द्वारा स्थापित किया गया था । इस निर्णय के पीछे रणनीतिक और जलवायु संबंधित अलग-अलग कारण हैं।

आपको राज्य की इतिहास में ले चले तो साल 1846 में अमृतसर की संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद जम्मू और साथ ही कश्मीर के क्षेत्र डोगरा साम्राज्य के अधीन आ गए, जो राजा का वंश था। राजा द्वारा कश्मीर के लोगों को खुश रखने के लिए श्रीनगर और जम्मू दोनों को राज्य की राजधानियां बनाया गया था और तय हुआ कि दोनों स्थानों पर 6 महीने के लिए सभा होगी । इस फैसले के पीछे यहाँ का मौषम भी एक कारण था, श्रीनगर में पड़ने वाली सर्दी के कारण सर्दियों में सभा करना मुश्किल होता था।

 उत्तराखंड

उत्तराखंड भारत के सबसे पवित्र राज्य में से एक है। हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बजट पेश किए जाने के दौरान चमोली जिले के गैरसैंण को राज्य का दूसरा एवं ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया ।

वजह?

उत्तराखंड राज्य जब से बना था तब से ही लोगों की मांग थी कि पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ में ही हो. इसमें आंदोलनकारियों के साथ-साथ कई संगठन और राजनीतिक दल भी समय-समय पर गैरसैंण को प्रदेश की राजधानी बनाने की मांग उठाते थे.

मीडिया रिपोर्ट्स को देखा तो , राज्य के मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को दूसरा राज्य बनाने पर कहा कि , ” उत्तराखण्ड एक सीमांत राज्य होने के कारण सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण और आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है. इन्हें सब बातों और प्रदेश की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ये ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है और गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया है.”

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश भी उत्तराखंड के तरह ही एक पहाड़ी प्रदेश है। हिमाचल प्रदेश की दो राजधानी शिमला और धर्मशाला है । शिमला ग्रीष्मकालीन राजधानी तो वहीं धर्मशाला शीतकालीन राजधानी है।

वजह? 

2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने धर्मशाला को राज्य की दूसरी राजधानी के रूप में घोषणा की । साथ ही कहा कि, ” धर्मशाला को राज्य की दूसरी राजधानी बनाने से राज्य के निचले इलाकों जैसे की कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर और ऊना जिलों में सुधार होगा और उन लोगों को लाभ होगा जिन्हें अपने काम के लिए शिमला तक लंबा सफ़र तय करना पड़ता था।

जिस तरह पहले के समय में नए राज्यों को ज़्यादातर प्रशासनिक कारणों से बनाया गया था, ठीक उसी प्रकार से आज के समय में एक से अधिक राजधानी का विचार भी प्रशासन में आसानी लाने के लिए, इन राज्यों में दूरदराज के क्षेत्रों में विकास के लिए, और सांस्कृतिक महत्व के लिए सामने आया । कई लोगों को ये बात भले ही नई लगे लेकिन ये चीज़ें कई दशकों से चली आ रही हैं।

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