अब्दुल कलाम कहते है कि “वो सपने सच नहीं होते जो सोते वक़्त देखें जाते है, सपने वह सच होते है जिनके लिए आप सोना छोड़ देते है।” यानी अगर आप कोई सपना देख लिया और सोचेगा की वो कल पूरा होगा बिना मेहनत का तब ये बिल्कुल भी नहीं हो सकता । आपको सपना को सच करने के लिए कठिन मेहनत करनी पड़ेगी । अगर आप हमेशा शॉर्टकट का राह पकड़ोगे तो आपको आपके सपने कभी हासिल नहीं होंगे , सपने और जीवन में सफलता पाने के लिए कठिन से कठिन मेहनत करनी पड़ती है । आज हम आपको एक ऐसा ही महिला के बारे में बताएंगे जिसने शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और 194 वी रैंक के साथ आईपीएस अधिकारी बनी ।आज की कहानी में हम यूपी के बागपत जिले में रहने वाली डॉ. प्रज्ञा जैन के बारे में बात करने वाले है । प्रज्ञा ने अपनी शुरुआती शिक्षा अपनी गांव बड़ौत से ग्रहण की । प्रज्ञा के पापा का प्रघ जैन था जो कि पेशे से एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है वहीं उनकी माताश्री भी दिल्ली यूनिव्सिटी से ग्रेड्यूशन की शिक्षा हासिल की है । घर में माता पिता पढ़े लिखे होने के कारण प्रज्ञा हमेशा से एक शिक्षित माहौल में रही और उनके माता पिता दोनों ने ही शुरू से ही प्रज्ञा के पढ़ाई पर ध्यान दिया ।

पढ़ाई में मिली अच्छी सफलताप्रज्ञा जैन को शुरू से ही उनके माता पिता ने अच्छा से ध्यान दिया जिसका कारण प्रज्ञा के रिजल्ट कभी भी खराब नहीं आया । बचपन से ही उनको पढ़ाई में सफलता मिलता गया । उन्होंने अपने मैट्रिक और इंटरमीडिएट के परीक्षाओं में जिला स्तर पर टॉपर बनी । बाद में कॉलेज में भी उनको गड्युएशन में गोल्ड मेडल हासिल हुआ । प्रज्ञा से दूसरे लोगो का दुख देखा नहीं जाता था इसलिए उनको डॉक्टर बनने का इच्छा था और उन्होंने इसकी मेहनत करके डॉक्टर भी बन गई ।

 

 

 

 

 

 

शादी के बाद भी मिला अच्छा माहौल

 

डॉक्टर बनने के कुछ समय बाद प्रज्ञा की शादी हो गई । उनकी शादी दिल्ली में रहने वाले विनीत जैन से हुई जो बैंक ऑफ बड़ौदा में चीफ मैनेजर की पोस्ट पर काम करते है वहीं उनके ससुर सुदर्शन जैन भी दिल्ली में बैंक ऑफ इंडिया में काम करते है । शादी के बाद में प्रज्ञा को इन सबके बीच एक अच्छा शिक्षित माहौल मिला जो कि प्रज्ञा को आगे पढ़ाई करने में मदद किया।

मानव सेवा के लिए upsc परीक्षा देना का फैसला।

शादी के बाद प्रज्ञा ने दिल्ली के शाहदरा में अपनी क्लीनिक खोल ली जिसमें वो लोगो का ट्रीटमेंट करती थी । लेकिन कुछ दिन बाद उन्हें लगा कि क्लीनिक से वो बड़े स्तर पर लोगो की सेवा करने नहीं सकेगा । इसी की कारण उन्होंने upsc परीक्षा देना का सोचा । इसपर प्रज्ञा को उनके घर वालो का भी साथ मिला इसके साथ ही प्रज्ञा जी जान से यूपीएससी की तैयारी में लग गई ।

 

 

 

दो बार असफल होने पर भी हार नहीं मानी प्रज्ञा।

 

उन्होंने पहला बार 2014 में यूपीएससी एग्जाम दिया जिसमे प्रज्ञा 2 नंबर से पास होने के लिए रह गई थी । 2015 में तबीयत ठीक नहीं होने के कारण भी इस साल की परीक्षाएं भी अच्छी नहीं गई और वो पास नहीं करनी सकी । दो बार असफल होने के बाद भी प्रज्ञा हार नहीं मानी और अपनी प्रयास जारी रखी । अब उनके पास बची थी एक अंतिम मौका यूपीएससी पास करने के लिए ।यूपीएससी परीक्षा देना की निर्धारित आयु सीमा के हिसाब से प्रज्ञा का ये लास्ट चांस था पास करने के लिए इसलिए प्रज्ञा इस मौका को छोड़ना नहीं चाहती थी और उन्होंने पूरी कोशिश लगा दी ।

 

 

यूपीएससी के एग्जाम और आईपीएस की इंटरव्यू समय थी प्रज्ञा प्रेगनेंट

 

प्रज्ञा ने तीसरा बार कड़ी मेहनत की इस समय प्रज्ञा प्रेगनेंट भी थी फिर भी प्रज्ञा पीछे नहीं हटी और अपनी मेहनत जारी रखे । डॉक्टर ने प्रज्ञा को दिया था बेड रेस्ट करने की सलाह पर फिर भी प्रज्ञा ने परीक्षा दिया ।उन्होंने इस बार यूपीएससी परीक्षा पास कर लिया । आईपीएस बनने के बाद जब प्रज्ञा जैन का इंटरव्यू लिया गया तब उन्होंने बताया कि यूपीएससी एग्जाम के बाद जब उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था तब भी वह प्रेगनेंट थी डॉक्टर ने तब भी उन्हें बेड रेस्ट करने को कहा था । लेकिन फिर भी प्रज्ञा इंटरव्यू देना गई थी । प्रज्ञा को बैठना में दिक्कत हो रही थी इसके कारण उन्होंने बोर्ड के सदस्यों को उनका इंटरव्यू पहले लेना को कहा । बोर्ड के सदस्य ने प्रज्ञा की बात समझी और उन्होंने उनकी इंटरव्यू सबसे पहले की और प्रज्ञा इंटरव्यू देकर घर पहुंच गई ।प्रज्ञा ने दिया बेटी को जन्म

 

 

 

 

प्रज्ञा ने बेटी को जन्म दिया । जिसका नाम उन्होंने पीहू रखा । पीहू ने प्रज्ञा के ज़िन्दगी में ढेर सारी खुशियां लाई । उन्हे बेटी के साथ साथ आईपीएस बनने की खुशखबरी भी मिला । प्रज्ञा को अपने यूपीएससी की कोशिश में सफलता मिली और उनका चयन भारतीय पुलिस सर्विस में हुआ। प्रज्ञा अब डॉक्टर से आईपीएस बन गई और उन्हें यूपीएससी एग्जाम में 194वे रैंक हासिल हुआ ।

 

परिवार ने भी दिया प्रज्ञा को मुश्किल समय में साथ

 

 

प्रज्ञा बताती है उनको यह परीक्षा पास करने के लिए उन्हें बहुत सी समस्या का सामना करना पड़ा था । वो एक साथ क्लीनिक भी संभालती थी साथ ही परीक्षा की तैयारी भी करती थी साथ ही उनके परीक्षा के समय वो प्रेगनेंट भी थी इसके चलते उन्हें ढेर सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन ऐसे मुश्किल समय में उनको परिवार के लोगो को खूब साथ मिला और हमेशा प्रज्ञा को प्रेरित करती थी ।

 

इंटरव्यू में पास होने के बाद भी प्रज्ञा के ज़िन्दगी में चुनौतियों का अंत नहीं हुआ । उनको ट्रेंनिग के लिए अपनी 6 महीने को बेटी को छोड़कर जाना पड़ता था । प्रेग्नेंसी के बाद उनको रेस्ट की भी जरूरत थी ,इसके कारण उनको ट्रेंनिग पर जाना मुश्किल थी लेकिन फिर भी प्रज्ञा हार नहीं मानी और ट्रेंनिग जाना शुरू कर दिया । ट्रेनिंग के बीच में एक बार प्रज्ञा का सामना एक हादसा से हुआ जहां प्रज्ञा के दोनों हाथो की हड्डियां फ्रैक्चर हो गया ।

 

प्रज्ञा इन सब समस्य से हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर डाठी रही और उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की एवं अंत में अपने कठिन परिक्ष्रम के आधार पर एक आईपीएस ऑफिसर बन गई । आज प्रज्ञा पंजाब में कार्यरत है । आईपीएस प्रज्ञा जैन की कहानी हम सबके लिए प्रेरणस्रोत है जो एक बार हार से हार मान जाते है अपनी ज़िन्दगी में । प्रज्ञा जैन की कहानी से हम सबको सीख लेना चाहिए और कठिन मेहनत जारी रखना चाहिए जबतक हम जिंदगी में सफल नहीं हो जाए ।

 

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