हल्दीराम कंपनी का नाम तो आप सभी ने सुना तो होगा ही साथ ही कभी ना कभी उसका आलू का भुजिया या मिठाई का स्वाद भी जरूर चखा होगा । आज हल्दीराम भारत में जाना माना ब्रांड में से एक है। शायद आपमें से बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि हल्दीराम ने कैसे फ़र्श से अर्श तक का सफर तय किया और आज कंपनी जिस मुकाम पर है, उस तक जाने के लिए कितना मेहनत कंपनी मालिको द्वारा किया गया होगा। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिनको नहीं पता है, तो आज हम आपको हल्दीराम की कामयाबी से जुड़ी कहानी बताने जा रहे हैं और मुझे अहसास है आपको पूरी कहानी पड़कर भारतीय होने पर गर्व होगा।

1937 में छोटी सी दुकान खोलकर रखा गया कंपनी की नीव

अपने शायद बहुत से लोगों के मुँह से ये जरूर सुना होगा कि हल्दीराम नई कंपनी है लेकिन ये बिल्कुल भी सच नहीं है क्यों कि इस कंपनी का इतिहास स्वतत्रंता से भी ज्यादा पुराना है। हल्दीराम की नीव आज से तकरीबन 84 साल पहले 1937 में बीकानेर में एक छोटी से नास्ते की दुकान खोलकर रखी गयी थी।

कुछ ही दिनों में हो गया था मशहूर

हल्दीराम के संस्थापक गंगाविषण अगरवाल द्वारा बीकानेर में नाश्ते की दुकान खोली गयी थी , जिसके मदद से वह व्यापार में कदम रखना चाहते थे। देखते देखते ही कुछ ही दिन में उनका छोटा सा नाश्ते का दुकान पूरा बीकानेर में भुजियावाले के नाम से मशहूर हो गया था, जिसके बाद गंगाविषण अगरवाल जी ने दुकान का नाम हल्दीराम रखा।

गंगाविषण अगरवाल जी ने हल्दीराम नाम इसलिए रखा था क्योंकि वह उनका दूसरा नाम था उन्होंने सोचा कि हल्दीराम नाम रखने से घर घर तक अपनी दुकान का नाम जाएगा। गंगाविषण अगरवाल ने देखते ही देखते पूरा बीकानेर में आलू भुंजिया के साथ साथ कई और तरह के नमकीनो का व्यापार शुरू कर दिया था। धीरे धीरे हल्दीराम ब्रांड की चर्चा पूरा देश में होनी लगी ।

भुजियावाले के रूप में पाई प्रसिद्ध

हल्दीराम एक मशहूर दुकान और ब्रांड के रूप में लोगों के बीच में जगह बना ली थी लेकिन उनका सफर अभी भी अधुरा था। इसलिए व्यापार को बढ़ावे देने के लिए हल्दीराम ने देश के अलग अलग राज्यों में आउट लैटस की नीव रख दी। इसके साथ ही हल्दीराम ने बीकानेर से देश की राजधानी दिल्ली तक का सफर तय कर लिया और व्यापार भी काफी अच्छे तरीके से चलने लगा। हल्दीराम देखते ही देखते कुछ ही सालों में अमेरिका तक पहुँच गयी।

कोलकाता में बनाया पहला मैनुफैक्चरिंग प्लांट

हल्दीराम कंपनी ने देश में पहला मैनुफैक्चरिंग प्लांट पश्चिम बंगाल के कोलकाता में लगाया । इसके बाद 1970 में जयपुर तो 1982 में देश की राजधानी नई दिल्ली में हल्दीराम ने अपने आउट लेट्स शुरू किया ।

देखते ही देखते 2003 में हल्दीराम ने अमेरिका में शुरू किया अपने उत्पादों का निर्यात । हल्दीराम ने ना केवल उसके बाद अधिक मुनाफा कमाया उसके साथ साथ खूब सारा नाम भी कमाया। आज हल्दीराम 100 से भी ज्यादा उत्पादनों का निर्माण करता है , जिसे 80 से ज्यादा देशों में निर्यात किया जाता हैं।

एक समय हल्दीराम को सहन करना पड़ा था घाटा

जैसे जैसे समय बिताते गया हल्दीराम नाम दिनों दिन कमाता गया । लेकिन इसी बीच हल्दीराम को 2015 में एक बड़ा झटका लगा जब अमेरिका ने हल्दीराम के निर्यात पर रोक लगा दिया। अमेरिका ने निर्यात पर रोक लगाने के ऊपर के कारण देते हुआ बताया कि हल्दीराम के उत्पादों में कीटनाशक का इस्तमाल किया जाता है जिसके कारण अमेरिका ने इसका आयात करने से साफ़ मना कर दिया।

अमेरिका द्वारा आयात पर रोक लगाने के बाद भी हल्दीराम ने अपनी पहचान दुनिया के बाकी देशों में पहले के तरह ही कायम रखने में सफल रही। हल्दीराम ने अपने उत्पादों के जरिया ना केवल नेशनल लेवल बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी लोगों का चाय का स्वाद बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

हल्दीराम की बढ़ती मांग को देखते हुआ कंपनी ने भारत में अपने आप को भौगोलिक क्षेत्र के हिसाब से तीन भाग में बांट लिया है। इससे कंपनी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचने में मदद मिलेगी जिससे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा होगा।

साल दर साल बढ़ता गया रेवेन्यू

अगर कंपनी की इकाइयों की हिसाब से रेवेन्यू की बात करें तो साल 2013 से 14 में उत्तर भारत में मौजूद मैनुफैक्चरिंग प्लांट का रेवेन्यू 2100 करोड़ का था, वहीं दक्षिण भारत में रेवेन्यू 1225 करोड़ रही तो पूर्वी भारत में कंपनी 210 करोड़ का मुनाफा कमाने में सफल रही। लेटेस्ट रेवेन्यू 2019 की बात करें तो कंपनी ने 7130 करोड़ की मुनाफा हासिल की इसको देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह साल दर साल हल्दीराम देश की लोकप्रिय ब्रांड बन गयी।

हल्दीराम के प्रोडक्ट्स

जैसे कि हम सब जानते हैं की हल्दीराम की शुरुआत एक छोटे से दुकान और भुजियावाले के रूप में हुई पर आज हल्दीराम कंपनी अपने ग्राहकों को कई तरह के खाध पदार्थ उपलब्ध करवाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दे हल्दीराम हर साल अपने प्रोडक्ट्स का निर्माण के लिए सालाना 3.8 अरब लीटर दूध, 80 करोड़ किलोग्राम मक्खन, 62 लाख किलोग्राम आलू और 60 लाख किलोग्राम देशी घी का खपत करता है ।

हल्दीराम से ना केवल लोगों को सिर्फ आलू भुजिया का स्वाद चखने को मिलता है बल्कि अलग अलग मिठाईयाँ , कचौड़ी , फूड आइटम्स और नमकीन समेत 400 से ज्यादा चीजों को स्वाद चकने को मिलता है। हल्दीराम अपने ग्राहकों को कम दाम में अच्छी गुणवता वाला भोजन उपलब्ध करवाने के लिए जाना जाता हैं । आज हल्दीराम के अकेले उत्तर भारत में 50 से ज्यादा आउट लेट्स है वहीं भारत में 125 से ज्यादा।

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