आजकल जिधर देखोगे उधर बदलाव दिखेगे, ठीक उसी तरह आज किसान भी अपने खेती करने के तरीके में बदलाव ले रहे है । आज अधिकतर किसान परंपरागत खेती को छोड़कर अन्य फसल की खेती करना शुरू कर रहे है ताकि उनको उससे अच्छी खासी मुनाफा हो सके। साथ ही किसान अब ज्यादा तरह के प्रयोग भी कर रहे है। ऐसे में बहुत से किसानो ने औषधीय पौधे की भी खेती कर रहे है । आज औषधीय पौधे किसानों को आमदनी का अच्छा खासा जरिया बन गया है। आइये आज एक ऐसे ही औषधीय पौधे के बारे में जानते है जो किसानों को अपनी लागत से तीन गुना ज्यादा मुनाफा दे रही है।

औषधीय पौधा ब्राह्मी की पहचान

हम जिस औषधीय पौधे की बात कर रहे है वो ब्राह्मी है। ब्राह्मी का वनस्पति नाम बाकोपा मोंनिएरी है। ये पौधा जमीन के अंदर फैलकर बड़ा होता है। इसके तने मुलायम और फूल सफेद रंग का होता है। ऐसे तो ब्राह्मी की अन्य प्रजातियों की खेती भी होती है जिनमे नीले और गुलाबी रंग की फूल होती है । ब्राह्मी की खेती ज़्यदातार नम स्थानों पर ही होती है । आपको इसका स्वाद के बारे में बताये तो ये पौधा काफी फीका और तासीर शीतल होती है।

कई जगह होता है ब्राह्मी का प्रयोग

ऐसे तो किसी भी औषधीय पौधा का कई जगह होता है प्रयोग उसी तरह ब्राह्मी भि आता है बहुत से जगह में काम। आपको बता दे ब्राह्मी की रस से गठिया का सफल इलाज होता है। वहीं इसका पत्तियां कब्ज दूर करने मे प्रयोग किया जाता है। आपको बता दे कई लोग इसका इस्तमाल रक्तशुद्धि के लिए भी करते है। साथ ही इसका प्रयोग से दिमाग तेज़ होता है और याददाश्त को बढ़ाने में सहायक होता है। इससे बने दवाइयों का प्रयोग कैंसर, दमा एनीमिया किडनी और मिर्गी जैसे गंभीर बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता हैं। इसका पौधा का प्रयोग सांफ के कटने पर भी किया जाता है।

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कई देशों में होता है ब्राह्मी की खेती।

आयुर्वेद में ब्राह्मी का पौधा बहुत ही गुणकारी माना जाता है। आपको बता दे इसकी जो जड़े है वो कांटो से फैलती है और यह 2-3 फीट तक बड़ा होता है। भारत के अलावा ब्राह्मी औषधीय पौधे की खेती अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के बहुत से देशों में भी किया जाता है। आपको जानकारी के लिए बता दे की इसकी खेती उष्णकटिबंधीय जलवायु में बहुत ही आसानी से किया जाता है। ब्राह्मी की खेती के लिए सामान्य तापमान अनुकूल माना जाता है।

ब्राह्मी की खेती में रखे इन बातों का ध्यान

ब्राह्मी की खेती नदी तालाब नहर आदि के किनारे जंगली रूप में उग आते है। अधिकतर किसान इसके खेती से होनी वाली मुनाफा को देखते हुए उन्होंने भी इसकी खेती करना चालू किया। दलदलयुक्त मिट्टी इसकी खेती के लिया अनुकूल माना जाता है । साथ ही ये भी ध्यान रखना है कि मिट्टी का pH मान 5 से 7 तक की होनी चाहिए। इसका अलावा ये भी ध्यान रखना है की इसकी खेती के लिए मिट्टी का भुरभुरा और समतल होना जरुरी है।

ब्राह्मी की रोपाई का तरीका

किसान जब इसका खेत तैयार करते ही तब वो खेतो की अच्छी तरह से जुताई करके छोड़ दिया जाता है। कुछ समय बाद किसान सही मात्रा में जैविक खाद डालकर मिला दिया जाता है। ब्राह्मी के पौधे की रोपाई के अनुसार खेत में मेढ और क्यारियां बनाई जाती हैं। वहीं ब्राह्मी के बीजों को इन क्यारीयों में बोया जाता है। पौधे बन जाने के बाद खेती में लगाया जाता है। पौधे की रोपाई मेढ़ पर आधा फीट की दूरी पर किया जाता है। आपको जानकारी के लिए बता दे प्रत्येक मेढ़ के बीच 25 से 30 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। वहीं पौधे की रोपाई के लिए वर्षा ऋतु का मौसम अनुकूल माना जाता है।

ब्राह्मी की अच्छी पैदावार के लिए निराई बेहद आवश्यक

आपको बता दे किसान अगर इसके फसल का निराई समय पर ना करता है तो पौधे की बढ़त पर बहुत प्रभाव पड़ता है। ब्राह्मी के खेत की निराई साल में लगभग 2 बार किया जा सकता है। पहली निराई फसल लगाने के 15 दिन बाद किया जाता है। दूसरी बार निराई करने के लिए सही समय दो महीने बाद का होता है। किसानो को इसकी खेती में अधिक ध्यान देना पड़ता है साथ ही इसकी खेती करने के लिए इससे जुड़ी सारी जनकारी लेना जरुरी है।

3 से 4 बार होती है ब्राह्मी के पौधें की कटाई

ब्राह्मी के पौधें की कटाई पौधे लगाने 4 माह बाद किया जाता है। इसके कटाई, इसके तने के 4-5 सेंटीमीटर ऊपर से कटा जाता है वहीं बाकी के हिस्सों को दोबारा पनपने की लिए छोड़ दिया जाता है । कटाई हो जाने के बाद किसान इसे छाया में सुखाते है। सुख जाने के बाद किसान इसको बाजार मे बेच सकते है। आपको बता दे आप अपने खेत के प्रति हेक्टेयर में 25 से 30 क्विंटल ब्राह्मी की सुखी पत्तियां प्राप्त की जा सकती है। इसकी फसल की कटाई किसानो द्वारा साल में 3 से 4 बार किया जाता है।

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