इस महामारी में हमें दुख के साथ साथ एक शिक्षा भी दी है कि हमारे स्वस्थ और सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। साथ ही हमने इस महामारी में देखा कि काफी लोग जो गांव छोड़कर शहर पलायन कर चुके थे वह घर वापस लौट रहें थे । इन्होंने गांव लौटकर काफी कुछ देख उनमें से एक था कि गांव में खेती जो कि महामारी में भी रुकी नहीं, किसान खेती करके उस समय भी अपनी रोजी रोटी चला रहे थे। इसलिए गांव लौटे बहुत से लोगों के मन में खेती करने का सुझाव आया। बहुत से लोगों ने इस महामारी में ब्रोकली की खेती करना काफी बेहतर समझा। आइए आगे जानते हैं ब्रोकली की खेती के बारे में विस्तार से।

ब्रोकली दिखने में बिल्कुल फुलगोभी जैसा :-

अगर अपने कभी ब्रोकली नहीं देखी हो तो बता दे ब्रोकली दिखने में बिल्कुल फूलगोभी के तरह होता है। हमने बहुत लोग से फूलगोभी और ब्रोकली में अंतर पूछना का प्रयास किया तो वह नहीं बता पाए। दरअसल अगर हम ब्रोकली और फूलगोभी की बीज और पौधे के करे तो इनमें हमें उतना अंतर देखनें को नहीं मिलता है।

कैसे पता लगाए ब्रोकली और फूलगोभी में अंतर

आइए जानते हैं कुछ तरीके जिससे हम ब्रोकली और फूलगोभी में अंतर समझ सके । अपने फूलगोभी में देखा होगा कि उसमें एक पौधे से एक ही फूल निकलता है परंतु वहीं अगर हम ब्रोकली की बात करें तो इसमें एक पौधे से गुच्छा निकाल सकते हैं और इनकी कुछ शाखाएं भी होती हैं। वहीं रंग की बात करें तो ब्रोकली हरे रंग की होती तो वहीं फूलगोभी सफ़ेद रंग की।

भारत में कहाँ होतीं है ब्रोकली की खेती

भारत में उत्तर के मैदानी क्षेत्रों में ठंड के समय में ज्यादातर ब्रोकली की खेती होती है। पहाड़ी इलाक़े जैसे उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में ब्रोकली की बीज तैयार किया जाता है और इसके बीज का निर्यात भी काफी बड़े मात्र में होता है। अगर ब्रोकली के लिए अनुकूल स्थिति और जलवायु की बात करें तो ज्यादातर ब्रोकली की खेती सर्द जलवायु में ही की जाती है। साथ ही जब इसका फूल तैयार होते हैं तब तापमान अधिक होने से इसके फूल पत्तेदार, पीले और चित्र धार होंगे। वहीं मिट्टी की बात करें तो इसकी खेती के लिए बलुई मिट्टी काफी सटीक मानी जाती है।

ब्रोकली के होते हैं विभिन्न प्रकार

बहुत से लोगों से अपने सुना होगा कि ब्रोकली एक ही तरह के होते हैं लेकिन ये सच नहीं ब्रोकली बहुत से प्रकार की होती हैं। इसमें ग्रीन स्प्राउटिंग, पेरिनियल, 9 स्टार, ब्रश बाथम और ग्रीन हेड जैसे भी प्रकार पाए जाते हैं। ब्रोकली की बीज को अंकुरित करने के लिए और पौधों की वृद्धि के लिए आपको तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस रखना होगा। अगर आप इसका नर्सरी तैयार करना चाहते हैं तो अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा उसके लिए सबसे सही समय मना जाएगा। पर्वतीय क्षेत्र में सितंबर और अगस्त में ब्रोकली की ज्यादातर खेती होती हैं। अगर आप इससे भी ऊँचा स्थान पर रहते हैं तो मार्च या अप्रैल में आपके द्वारा इसका खेती करना बेहतर होगा।

ब्रोकली की खेती के लिए नर्सरी तैयार करना होगा पहला काम

ब्रोकली की रोपाई से पहले उसके नर्सरी को तैयार किया जाता हैं। अगर आप कम संख्या में ब्रोकली की पौधे करने की सोच रहे हैं तो 3 फीट लंबी और 1 फीट चौड़ी और जमीन की सतह से 1.5 सेंटीमीटर ऊंची आपको बीच की क्यारियों की बुवाई करनी पड़ेगी। बुवाई के बाद आपको घास के महीन परत से उठाकर समय समय पर सिंचाई करने की जरूरत पड़ेगी। जब पौधे निकालने लगते हैं तब उसमें से घास फूस को हटा देते हैं।

ब्रोकली की पौधे चार पांच हफ्तों में ही खेत में रोपाई करने लायक हो जाते हैं। जैसे ही पौधे रोपाई के लिए अनुकूल होते हैं आप इसे पंक्ति में निश्चित दूरी पर रखकर रोपाई कर दें। आपको इस बात का ध्यान रखना है कि जिस जगह पर आप इसकी रोपाई करने जा रहे हैं वहां नमी पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए क्योंकि इसकी सिंचाई हल्की होती है।

1 हेक्टेयर में 13 से 15 टन तक होती हैं पैदावार

आप ब्रोकली एक हेक्टेयर में 13 से 15 टन तक का पैदावार कर सकते हैं। आपको इसकी खेती से तीन से चार महीनों में 4 से 5 लाख की आमदनी हो सकती है।

ब्रोकली में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण तत्व

आपकी जानकारी के लिए बता दे ब्रोकली में केरेटनोइड्स ल्युटिन पाया जाता है। केरेटनोइड्स ल्युटिन के बहुत सारे फ़ायदे है अगर हम इसको खाते हैं तो हमारा दिल हमेशा स्वस्थ रहेगा। ब्रोकली में पोटैशियम कोलेस्ट्रॉल के स्तर भी काफी कम होते हैं। साथ ही बहुत से लोगों द्वारा कहा जाता है कि ब्रोकली में सीता केमिकल भी ज्यादा मात्रा में पाई जाती है। इससे हानिकारक पदार्थ निकल जाते हैं। ब्रोकली इम्यूनिटी बूस्टर की तरह भी काम करती हैं।

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