आजतक हमने बहुत लोगों से सुना होगा कि इंसानों से ज्यादा वफादार जानवर होते हैं, जी हैं ये बिल्कुल सच है। आज बहुत से लोग अपने घर कुत्ते एवं दूसरे जानवर पालते हैं, ये जानवर कई तरह से अपने मालिक को सुरक्षा प्रदान करते हैं। हमने पुलिस कर्मियों को भी अपने साथ कुत्ता रखते देखा है जो पुलिस को मुजरिम खोजना में मदद करता है। आज हम एक ऐसे ही जानवर की कहानी लेकर आये है जिसने अपनी वफादारी से बहुत नाम कमाया।

मागवा ने बचाई हज़ारो व्यक्तियों की जान

आज हम किसी कुत्ते बिल्ली नहीं बल्कि एक चूहा की बात करने वाले है। जी अपने बिल्कुल सही सुना एक चूहा जिसने लोगों की रक्षा की और आज वो अपने काम से निर्वत्त हुआ है। आज हम अफ्रीका नस्ल की मागवा चूहे की बात कर रहें है। पिछले कई वर्षो में मागवा चूहे ने कंबोडिया नामक देश में कई रुदी सुरंगों को खोजा और करीब हज़ारो व्यक्ति की जान बचाई ।

अत्यंत तेज़ सुघने की क्षमता रखता है मागवा चूहा।

पिछले कई दिनों से इसके बहादुरी के चर्चे सोशल मीडिया पर हो रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दे मागवा चूहे की सूंघने की क्षमता इतनी तेज है आप इस बात से पता लगा सकते हैं कि मागवा चूहा बारुदी सुरंग का पता लगाने वाली मशीन को भी पछाड़ दे। ये ही कारण था कि मागवा चूहे को अधिकारिक रक्षा दल में स्थान दिया गया था ।

मागवा चूहे का वजन केवल 1.2 किलो है इसके चलते इसका सुरंगों के ऊपर चलने पर भी विस्फोट नहीं होता । इस चूहे की काफी हाई लेवल ट्रेनिंग दी गयी है । आज उस ट्रेनिंग की मदद से चूहा काफी बड़ा इलाक़े को कम से कम समय में सुंघकर जांच कर सकता हैं।

मागवा के हो चुके 7 वर्ष

मागवा नामक इस चूहे का आयु 7 वर्ष है। इसी कुछ वर्ष पपहले कंबोडिया में बारुदी सुरंग को खोजने के लिए ट्रेनिंग दिया गया था। मागवा को दिया गया ये काम मागवा ने काफी अच्छे तरह से पुरा किया। मागवा ने ना केवल बारुदी सुरंगों का पता लगाया बल्कि उसने कई तरह के जिंदा विस्पोटको को भी खोजने में सुरक्षा कर्मियों की मदद की। कंबोडिया के APOPO संगठन ने मागवा की ट्रेनिंग पूरी की। रिपोर्ट के अनुसार कंबोडिया का ये संगठन चूहों को बारूद की सुरंगों तथा बमों को खोजने की ट्रेनिंग देता है। ऐसे तो मागवा पूर्णता स्वस्थ है, पर आयु सीमा पूरा होने के नियम के अनुसार उसका रिटायरमेंट हुआ है।

मागवा को दिया गया है गोल्ड मेडल

आपको बता दे ब्रिटेन की एक चैरिटी संस्थान PDSA ने मागवा को उसके कार्य के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया है। दर असल ब्रिटेन की ये चैरिटी संस्थान उन जानवरों को प्रतिवर्ष उन जानवरो को सम्मानित करती है जो अच्छे कार्य करते हैं परंतु इस बार ऐसा पहली बार हुआ है जब इस संस्था ने किसी चूहे को सम्मानित किया। मागवा को ट्रेनिंग देने वाले व्यक्ति कहते हैं आज मागवा द्वारा किया जा रहा काम हम सबको गर्व का महसूस करवाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *